लेख : अब्दुल हमीद
भारत एक संस्कार, संस्कृति और परिवारों वाला देश माना जाता है। लेकिन आज शराब का बढ़ता चलन समाज के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है — क्या देश में शराबबंदी होनी चाहिए?
शराब से सरकार को भारी टैक्स मिलता है, लेकिन दूसरी तरफ इसका असर परिवार, स्वास्थ्य और समाज पर भी साफ दिखाई देता है। देश में हर साल लाखों सड़क हादसे, घरेलू हिंसा, अपराध और स्वास्थ्य समस्याओं के पीछे शराब को बड़ा कारण माना जाता है। गरीब परिवारों में अक्सर कमाई का बड़ा हिस्सा शराब में खर्च हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च प्रभावित होता है।
कई राज्यों में शराबबंदी लागू करने की कोशिश हुई। Bihar में पूर्ण शराबबंदी लागू है, जबकि Gujarat में लंबे समय से प्रतिबंध है। समर्थकों का कहना है कि इससे अपराध और घरेलू हिंसा में कमी आई। लेकिन विरोधियों का तर्क है कि शराबबंदी के बाद अवैध शराब और तस्करी बढ़ जाती है, जिससे जहरीली शराब की घटनाएं सामने आती हैं।
आज जरूरत केवल कानून की नहीं, बल्कि जागरूकता की भी है। अगर समाज खुद नशे से दूर रहने का संकल्प ले, तो इसका असर ज्यादा बड़ा हो सकता है। युवाओं को रोजगार, खेल और शिक्षा की ओर बढ़ाना भी जरूरी है ताकि वे नशे की गिरफ्त में न जाएं।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह जनता के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे या राजस्व को। शराबबंदी का फैसला आसान नहीं है, लेकिन यह बहस जरूर जरूरी है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसा भारत बनाया जाए।
अब सवाल जनता से — क्या आप भारत में पूर्ण शराबबंदी के पक्ष में हैं?
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