(सोनभद्र) :आपको बता दे की जिले मै सबसे ज्यादा औधोगिक प्रदूषण वाले सोनभद्र-सिगरौली क्षेत्र में कोयला आधारित 20 हजार मेगावाट से ज्यादा क्षमता की इकाइयां स्थापित हैं। फिलहाल इस क्षमता को 30 हजार मेगावाट से ज्यादा करने की योजना चल रही है। कोयला आधारित बिजली उत्पादन के साथ ही अन्य ऊर्जा स्त्रोत पर भी केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की नजरें हैं।
वही वर्तमान में ओबरा तापीय परियोजना के विस्तारीकरण के तहत 660 मेगावाट की दो इकाइयां निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा एनटीपीसी के तहत भी 800 मेगावाट की दो और ओबरा डी के तहत 800 मेगावाट की दो इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव है। पिछले वर्षों हुए यूपी इंवेस्टर्स समिट में सोनभद्र को लेकर निवेशकों में काफी उत्साह देखा गया था। कोयला आधारित इकाइयों के बढ़ने के कारण सोनभद्र-सिगरौली क्षेत्र औद्योगिक प्रदूषण खतरनाक रहा है। यहां स्थापित होने वालीं संभावित इकाइयों से प्रदूषण स्तर और गंभीर हो सकता है।
सोनभद्र-सिगरौली क्षेत्र में बढ़ते कोयला की खपत के कारण सल्फर डाइआक्साइड के उत्सर्जन में वृद्धि जारी है। यही नहीं केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा नई जगहों की खोजबीन भी की जा रही है। इसमें सोनभद्र के कई जगहों पर नई इकाइयों की स्थापना पर विचार चल रहा है। पर्याप्त बिजली देने के लिए प्राधिकरण ने तापीय बिजली के उत्पादन में फिलहाल देश में स्थापित क्षमता से 100 फीसदी से ज्यादा वृद्धि की संभावना तलाशी है। वर्तमान में स्थापित क्षमता लगभग 3.49 लाख मेगावाट के सापेक्ष 4.28 लाख मेगावाट से ज्यादा नए उत्पादन बढ़ाने पर विचार चल रहा है। देश में सबसे ज्यादा एसओटू का उत्सर्जन सिगरौली औद्योगिक क्षेत्र वर्ष 2019 में देश में सल्फर डाइआक्साइड उत्सर्जन के मामले में देश में सबसे ऊपर रहा है। ग्रीनपीस इंडिया और सेंटर फार रिसर्च आन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की वार्षिक रिपोर्ट में सिगरौली क्षेत्र में वर्ष 2018 के सापेक्ष 2019 में सल्फर डाइआक्साइड के उत्सर्जन में 8.6 फीसद की वृद्धि हुई है। जारी रिपोर्ट के अनुसार सिगरौली में वर्ष 2018 में 442 किलो टन सल्फर डाइआक्साइड उत्सर्जित हुई थी जो 2019 में बढ़कर 479 किलो टन हो गई। सल्फर डाइआक्साइड एक जहरीली गैस है जिसके प्रदूषण से स्ट्रोक (पक्षाघात), हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर और अकाल मौत का जोखिम बढ़ जाता है…..
सोनभद्र जिले से सतीश दुबे ( ब्यूरो )…..✍️✍️✍️
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