राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर उठाया दल-बदल का मुद्दा, संविधान के नियमों का हवाला
नई दिल्ली
✍️ रिपोर्ट:अब्दुल हमीद
entity[“politician”,“संजय सिंह”,“AAP नेता”] (आम आदमी पार्टी) ने राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर मांग की है कि entity[“political_party”,“आम आदमी पार्टी”,“India”] छोड़कर entity[“political_party”,“भारतीय जनता पार्टी”,“India”] (BJP) में शामिल हुए सात सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाए।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इन सांसदों ने जनता के विश्वास और संविधान की भावना के खिलाफ जाकर पार्टी बदली है। उन्होंने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर दल-बदल कानून के दायरे में आता है और इसके तहत कार्रवाई जरूरी है।
⚖️ क्या है दल-बदल कानून?
भारत में लागू एंटी-डिफेक्शन कानून के अनुसार, यदि कोई सांसद अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। इस कानून का उद्देश्य राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना और खरीद-फरोख्त को रोकना है।
📌 विवाद की जड़
बताया जा रहा है कि जिन सात सांसदों को AAP ने राज्यसभा में भेजा था, उन्होंने बाद में पार्टी छोड़ दी और BJP में शामिल हो गए। इस पर AAP ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे नियमों का उल्लंघन बताया है।
🗣️ संजय सिंह का बयान
संजय सिंह ने कहा कि “जनता ने इन सांसदों को AAP के नाम पर चुना था, लेकिन उन्होंने निजी हित में पार्टी बदल ली। यह लोकतंत्र के साथ धोखा है।”
🔍 अब क्या होगा?
अब इस मामले पर अंतिम फैसला राज्यसभा सभापति को लेना है। यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित सांसदों की सदस्यता रद्द की जा सकती है।
📢 निष्कर्ष:
यह मामला आने वाले समय में राजनीति में दल-बदल और उसकी वैधता पर बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।

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