Breaking News
Home / न्यूज़ / *सोनभद्र जिले में प्राकृतिक रंगों से होली खेलता है आदिवासी समाज, रंगों से चेहरे पर नहीं होता नुकसान*

*सोनभद्र जिले में प्राकृतिक रंगों से होली खेलता है आदिवासी समाज, रंगों से चेहरे पर नहीं होता नुकसान*


 

सोनभद्र:- आपको बता दे की जिले मै होली पर्व की खुशियां जहां रासायनिक रंगों में घुलती जा रही है वहीं जिले का आदिवासी समाज प्रकृति के रंगों पर निर्भर है। आधुनिकता की अंधी दौड़ में कुछ परिवार भले ही शामिल हो गए हों, लेकिन बहुतायत में यह समाज पारंपरिक रंग को ही पिचकारी का हिस्सा बनाता है।

दुद्धी तहसील के सबसे दुरूह व पहाड़ी इलाका बरखोरहा,बभनी,बैरखड़, करहिया, बोधाडीह, औराडंडी आदि गांवों में सालों पहले की परंपराएं आज भी जिंदा हैं। यहां के मूल निवासी चेरो, गोंड़, खरवार आदिवासी जातियां पलाश (टेसु), फूलझड़ी, सेमल आदि के फूलों से बने रंगों से होली का पर्व मनाते हैं। आदिवासियों का कहना है कि हम लोग अब तक अपने हाथों से प्राकृतिक फूलों के बनाए रंगों से ही होली खेलते आए हैं, जो आज भी अनवरत चल रहा है। हालांकि बढ़ते प्रदूषण तथा अंधाधूंध कटते जंगलों के कारण अब पर्याप्त मात्रा में फूलों का मिलना बड़ी मुश्किल हो गया है, फिर भी किसी तरह से अभी काम चलाया जा रहा है। आदिवासी शिव कुमार, रामचंद्र, बेचू, जुगूल, जितन, फूलकेश्वर ने बताया कि प्राकृतिक फूलों से बनाया गया रंग तथा गुलाल काफी टिकाऊ भी होता है। एक बार रंग लग जाए तो उसकी पहचान पूरे साल तक रहती है। सबसे खास बात कि प्राकृतिक रंगों से कभी भी किसी को कोई नुकसान या चेहरे पर कोई दाग नहीं पड़ता है…

✍️✍️✍️सोनभद्र जिले से सतीश दुबे (ब्यूरो )

About Epf 7 News

Epf 7 News
हमारा मकसद सिर्फ लोगो की मदद करना है.

Check Also

राष्ट्रहित सर्वाेपरि: शासन-प्रशासन एवं सर्राफा व्यापारियों के मध्य बचत भवन में सम्पन्न हुई महत्वपूर्ण बैठक

🔊 पोस्ट को सुनें रायबरेली, 16 मई, 2026! स्थानीय बचत भवन सभागार में जिलाधिकारी श्रीमती …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *